द्विप उत्तरी सेंटिनल का रहस्य

 द्वीप उत्तरी सेंटिनल का रहस्य विस्तार से|

 Island of north Sentinel mystery

दोस्तों, उत्तरी सेंटिनल द्वीप अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह का एक हिस्सा है।  अंडमान एंड निकोबार द्वीप समूह में करीब 572 द्वीप है । जिनमें से 32 पर लोग रहते हैं और 12 द्वीप पर्यटकों के लिए  खुले  हैं। इन सारे द्वीपों को 3 जिलों में विभाजित किया गया है- मध्य अंडमान, दक्षिणी अंडमान, एवं निकोबार। इनकी राजधानी पोर्ट ब्लेयर है जो दक्षिणी अंडमान पर स्थित है। यहां से लगभग 50 किलोमीटर दूर एक द्वीप स्थित है जिसे हम उत्तरी सेंटिनल के नाम से जानते हैं  यहाँ रहने वाले लोगों को हम सेंटनलिज के नाम से जानते हैं।

1. उत्तरी सेंटिनल द्वीप का इतिहास-

    उत्तरी सेंटिनल जनजाति के बारे में कहा जाता है कि यह लोग आज से 10000 से 30000 साल पहले इस द्वीप पर आए थे। और माना जाता है कि तभी से यह लोग बाकी दुनिया से अलग रहे हैं। 
माना जाता है कि यह लोग जो उत्तरी सेंटिनल द्वीप पर रहते हैं जो प्रत्यक्ष रूप से उन लोगों के वंशज हैं जो अफ़्रीका से विस्थापित हुए थे।

2. एकमात्र अंतिम पाषाण युग जनजाति-

    कृषि का आविष्कार आज से लगभग 12000 साल पहले हुआ था यह लोग खेती के बारे में नहीं जानते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि यह अंतिम पाषाण युग जनजाति है जो अंतिम पाषाण युग के लोगों की तरह रहते हैं। ये अंतिम पाषाण युग के लोगों की तरह ही  अपने भोजन को उगाकर नहीं खाते बल्कि जानवरों का शिकार करते हैं, पेड़ों से फल तोड़कर इकट्ठा करते हैं और मछलियां पकड़ कर अपना पेट भरते हैं।  यह दुनिया की एकमात्र एकांत जनजाति है।

    3. नरभक्षीयों का द्वीप-

          दूसरी शताब्दी में एक रोमन गणितज्ञ क्लॉडियस पलोटेमी ने उतरी सेंटिनल द्वीप पर रहने वाले लोगों को नरभक्षी कहकर पुकारा था उनके अनुसार इस द्वीप पर रहने वाले लोग मनुष्य का मांस खाते हैं।  इसके बाद 673 AD में एक चीनी यात्री ने भी कहा था कि यहां रहने वाले लोग नरभक्षी है परंतु इस बात के कोई सबूत नहीं मिले हैं।

    4. सेंटिनलीज जनजाति को सभ्य करने की कोशिश-

       सन 1880 में,मोरी स्वीडन पोर्टमैन नाम के एक ब्रिटिश अधिकारी ने  निर्णय लिया कि वे इन लोगों से संपर्क साधने की कोशिश करेंगे और इन्हें सभ्य बनाने की कोशिश करेंगे। इस समय ब्रिटिश लोग दूसरी जनजातियों से संपर्क कर चुके थे और इसमें कामयाब भी हुए थे । उनके साथ बात भी करते थे । मोरी स्वीडन ब्रिटिश अधिकारी ने दूसरी जनजाति के कुछ लोगों को अपने साथ लेकर इस द्वीप पर गए और उन लोगों से बात करने की कोशिश की परंतु उन्होंने यह पाया कि उनकी भाषा और रहन-सहन इन लोगों से बिल्कुल अलग है और वे उन लोगों से बातचीत नहीं कर पा रहे थे  सेंटनलिज लोगों ने इन पर हमला कर दिया। उनके बाद बहुत बार इस जनजाति से संपर्क साधने की कोशिश की गई परंतु हर बार असफल रहे।


    5. पहनावा व दिखावट-

        इन लोगों की ऊंचाई लगभग 5 फीट होती है और इन लोगों के बाल काफी छोटे होते हैं और चमड़ी का रंग गहरा काला होता है।  इनमें से कुछ लोगों के मुंह पर पीले रंग का लेप लगा हुआ होता है  यह लोग कपड़े नहीं पहनते है परंतु पुरुष कमर में ,गर्दन में  रेसे की  चोड़ी डोरियां और औरतें पतली रेसे की डोरिया पहनती है।
       

    निष्कर्ष-

    यह जनजाति प्राचीन समय से ही एकांत रहीं है वह बाहर की दुनिया के साथ कोई संपर्क नहीं करना चाहती है ।यदि हम लोग उनसे संपर्क साधने की कोशिश करेंगे तो आधुनिक समय की बीमारियां व कीटाणु उनके लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं। उनके अंदर आधुनिक समय की बीमारियों को सहन करने की प्रतिरोधक क्षमता विकसित नहीं हुई है । यह उनकी जनजाति के लिए खतरनाक हो सकता है  इसका नतीजा यह हुआ कि 1997 में भारत सरकार ने इस द्वीप के आसपास 5 किलोमीटर की त्रिज्या के अंदर किसी भी बाहरी लोग के जाने पर रोक लगा दी।


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