Mystery of titanic
Mystery of TITANIC |
टाइटेनिक जहाज का रहस्य
द आर. एम. एस. टाइटेनिक जहाज अपने समय का दुनिया का सबसे बड़ा जहाज था इसकी लंबाई लगभग 269 मीटर और ऊंचाई 53 मीटर थी । टाइटेनिक जहाज व्हाईट स्टार नाम की कंपनी द्वारा बनाया गया था जिसके प्रेसिडेंट ए .एस . फरेंक्लीन थे टाइटेनिक जहाज दुनिया का सबसे बड़ा जहाज होने के साथ इसमें जो लग्जरी इस्तेमाल की गई थी वह भी चौकानें वाली थी ।किसी सामान्य आदमी के लिए इस जहां से सफर करना सपने के बराबर था। उस जमाने में इस जहाज को बनाने में 7.5 मिलियन डॉलर का खर्च आया था जो कि आज के समय के 400 मिलियन डॉलर के बराबर है टाइटैनिक जहाज के अंदर दी जाने वाली सुविधाएं किसी फाइव स्टार होटल से कम नहीं थी और जिस तरह की सुरक्षा सुविधाओं का इस्तेमाल किया गया था ऐसा माना जाता था कि यह जहाज कभी भी नहीं डूब सकता।
Titanic sinking real story-
द आर.एम .एस . टाइटेनिक 12 अप्रैल 1912 को अटलांटिक महासागर में अमेरिका के लिए निकलता है अपने सफर पर रवाना होने के सिर्फ दो ही दिन बाद टाइटैनिक के नाविकों को चेतावनी संकेत मिलते हैं कि रास्ते में बड़े-बड़े बर्फ के पहाड़ है जो जहाज के लिए खतरा है यह चेतावनी समुद्र में चलने वाले जहाजों के द्वारा अपने आसपास के जहाजों को दी जाती है ताकि दुर्घटना से बचा जा सके।
टाइटेनिक जहाज 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ रहा था टाइटेनिक जहाज के कप्तान और नाविकों को लगातार चेतावनी मिल रही थी कि रास्ते में बर्फ के बड़े बड़े पहाड़ है परंतु वे इन चेतावनीयों पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं ।
रात के समय में जहाज तेजी से आगे की तरफ बढ़ रहा था जहाज पर मौजूद लोगों को रास्ते में बर्फ का एक बहुत बड़ा पहाड़ दिखाई देता है जिसका वजन लगभग 1.5 मिलियन टन था परंतु अब बहुत देर हो गई थी और टाइटैनिक की रफ्तार भी बहुत तेज थी जहाज की रफ्तार तेज होने के कारण जहाज को किसी भी तरफ मोड़ना बहुत मुश्किल था
बहुत ही कम समय मे टाइटैनिक जहाज बर्फ के पहाड़ से टकरा गया और उसकी दाईं तरफ का अगला हिस्सा पूरी तरह से टूट गया टकराव के करीब 20 मिनट बाद कप्तान स्मिथ अपने सीनियर रेडियो ऑपरेटर जेक फिलिक को डिस्ट्रेस कॉल सिंगल भेजने का आर्डर देते हैं ताकि अगर कोई जहाज आस-पास हो तो वह उनकी मदद कर सके । टाइटैनिक से करीबन 107 किलोमीटर दूर आरएमएस कार्पेथिया नामक जहाज इस सिग्नल को रिसीव करता है और उनकी मदद के लिए निकल पड़ता है । कर्पेथिया जहाज को इस दूरी को तय करने में लगभग साढ़े 3 घंटे का समय लगने वाला था।
टाइटेनिक जहाज के बारे में लोगों को लगता था कि यह कभी डूब नहीं सकता और कंपनी का भी यही मानना था इसलिए जहाज पर लाइफबोट्स भी जरूरत से कम थी। जहाज का आगे का हिस्सा पूरी तरह से टूट चुका था और पानी के अंदर डूब रहा था परंतु लोगों को अभी भी लग रहा था कि यह जहाज नहीं डूबेगा इसलिए लोग शांत थे । टाइटेनिक जहाज पर लगभग 2200 लोग मौजूद थे जिनमें से 700 लोगों को लाइफ बोट्स की मदद से बचा लिया गया और बाकी बचे लोग जहाज के साथ ही डूब गये ।



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